सफर अब तक

मैं रिश्तों में दौड़ने के बजाय, थोड़ा रुकना पसंद करूंगा,

जीवन और मृत्यु.........

मृत्यु, जो जीवन का अंतिम छण हैं। मृत्यु तो आसान हैं, मृत्यु दो पल की बात हैं। कठीन हैं तो जीवन और जीवन को जीना। जीवन हैं क्या? जन्म और मृत्यु के बीच का समय ही हैं जीवन । जन्म के साथ ही जीवन शुरू होता हैं , और खत्म मृत्यु के साथ । जन्म के साथ ही जीवन का संघर्ष जारी होता हैं और मृत्यु जब तक न प्राप्त हो जाए यह संघर्ष जारी रहता हैं। आखिर संघर्ष किस बात का? एक बार सोचिए खुद से, जब आपके पास कुछ न हो, न परिवार, न दोस्त, न कोई अपना, न घर और न ही किसी भी प्रकार कोई संपत्ति और न ही कुछ खाने के लिए।तब आप संघर्ष करेंगे इन सभी चीजों को पाने के लिए यहां तक की उस रोटी के लिए जो आपको जिंदा रखे । यहीं जीवन हैं जिसको चलाने के लिए हम मृत्यु तक संघर्ष करते हैं, कभी खुद से तो कभी दुनिया से ताकि हमारा आसित्व बना रहें।

-अनुभव सिंह सोनी

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